संयुक्त अरब इमारात की ख़ुफ़िया एजेंसी ने रिपोर्ट दी है कि यमनी सेना सऊदी अरब और उसके अमेरिका एवं इस्राईल सहित दूसरे अरब साथियों के पाश्विक हमलों का लगाता जवाब दे रही है। इस बीच एक ओर जहां यमनी सेना, सऊदी अरब के स्ट्रेटेजिक सैन्य ठिकानों एवं हवाई अड्डों को अपने ड्रोन का लगातार निशाना बना रही है। वहीं दूसरी ओर सऊदी अरब कि जिसके पास अमेरिका का आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम पैट्रियट मौजूद है, लेकिन उसके बावजूद वह यमनी ड्रोनों द्वारा किए जा रहे हमलों को रोकने में बुरी तरह नाकाम रहा है और यह कारण बन रहा है सऊदी सैनिकों के मनोबल गिरने का।
मिडिल ईस्ट आई के अनुसार संयुक्त अरब इमारात की ख़ुफ़िया एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक़, यमनी ड्रोन द्वारा सऊदी अरब पर किए जा रहे हमलों से सबसे अहम चीज़ जो सामने आई है वह है सऊदी अरब की रक्षा क्षमता। मिडिल ईस्ट आई के अनुसार जिस तरह यमनी ड्रोन सऊदी अरब के अंदर घुसकर हमले कर रहे हैं उससे सऊदी अरब के साथ-साथ अमेरिका के एयर डिफेंस सिस्टम पैट्रियट की पोल खुलती है। यूएई की ख़ुफ़िया एजेंसी की रिपोर्ट में यह कहा गया है कि अमेरिका के पैट्रियट सिस्ट यमनी ड्रोनों को स्पॉट करने में सक्षम नहीं है क्योंकि यह पैट्रियट सिस्टम, लंबी और मध्यम श्रेणी की स्कड मिसाइलों को रोकने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
यूएई की ख़ुफ़िया एजेंसी की रिपोर्ट में आया है कि, सऊदी अरब के दक्षिणी प्रांत नजरान के एयरपोर्ट पर यमनी ड्रोनों ने उस समय हमला किया था जब वहां अमेरिका के पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम स्थापित था, लेकिन उसके बावजूद यमनी ड्रोनों ने अपने सटीक लक्ष्यों को निशाना बनाया। याद रहे कि वर्ष 2018 में भी यमनी ड्रोन ने यूएई के दुबई एयरपोर्ट के निशाना बनाया था और उस समय भी यमन के सम्माद-3 ड्रोन विमान की कार्यवाही से पैट्रियट मिसाइल की विफलता साबित हो गई थी। हालांकि यूएई ने इस मिसाइल रक्षा प्रणाली को ड्रोन विमानों के हमले से बचने के लिए ही ख़रीदा था।
कुल मिलाकर सबूतों के विश्लेषण के बाद अमेरिका की मिसाइल डिफेंस तकनीक पर लंबे समय से चली आ रही शंका एक बार फिर सामने आ गई है। अमेरिका और उसके सहयोगियों की यह महत्वकांक्षी योजना ईरान और उसके सहयोगियों को ध्यान में रखकर विकसित की गई थी। अगर यह तकनीक इतने छोटे ड्रोन मिसाइल को टारगेट करने में असफल हो जाती है तो यह सोचना मुश्किल है कि अमेरिका की पैट्रियट मिसाइल डिफेंस तकनीक ईरान और उत्तर कोरिया जैसे देशों की विकसित मिसाइलों को कैसे निशाना बना पाएगी।